બુધવાર, 24 ઑગસ્ટ, 2016

ફૂલ

ધરણી ની છાતી સૂકી ને વાદળને આવ્યું વ્હાલ
સૂરજે કરી સાજીશ એમાં રોયું ઘાસ આસપાસ

જા જા કરતી ઉડી લટો ને પવને કર્યું'તું વ્હાલ
વિજલડી ત્રાટકી ભીંજ્યું એક ફૂલ મજાનું ખાસ 
----રેખા શુક્લ

મંગળવાર, 23 ઑગસ્ટ, 2016

नुमाईश नजारां

रूत्बाऍ इशक का वाह वाह नजारां
मेहफीले महेंकी जनाबी सलाम नजारां

ख्वाबे महोबत में तीरे निशां हैं नजारां
दीवानापन बेबस निगाहें छेडे नजारां

दिल बना पागल सब्र करे कत्ल नजारां
छुके निकले हवां उफ्फ ये झ्ख्मी नजारां
----रेखा शुकला

બુધવાર, 10 ઑગસ્ટ, 2016

વરદાન


સાંભળી તુજ ની વાતો
તુ જ રહે રે મુજમાં 
તો ય ટાંકણે ટિચાણો
પથ્થર બની  મુજમાં
કહે છે અબળા મુજને
ને પાંગણો તું ભીંતમાં
ચણાયો જડાયો પૂજાણો
ઠોકરે ચડાવી મુજને તુજમાં
પોકાર મારી સાંભળજે 
વિનંતી કરું અરજ તુજ માં
આસ્થા કુંવારિકા ની તુજ માં 
ધરું પુષ્પક કાયાનું ચરણમાં
----રેખા શુક્લ



શુક્રવાર, 5 ઑગસ્ટ, 2016

निगोडी हायें ...

भीगे पथ से अग्नि पथ तक गीतो के बादल छायें
उफ्फ ये छमछम नाची फिरभी पायल निगोडी हायें 
---रेखा शुक्ला

સંઘરૂં મુજ આંખ ના તળાવ ને તારી યાદો ત્યાં વસી છે 
ઘૂંઘરું મુજ પાવ ના વણાંક માં તારી યાદો ત્યાં ફસી છે 
----રેખા શુક્લ

हुई चांदनी पानी पानी...उतरे तारें आंचलमें
भई बावरी रानी जानी...खतरे सारे आंचलमें
----रेखा शुक्ला

શનિવાર, 30 જુલાઈ, 2016

મસ્તી


મોનસૂન મસ્તી એ વરસાદ ચડ્યો 
પેહલાં ટીપા ને અઢેલીને વળગ્યો
શરમાતી ધરતી ને વળગી પડ્યો
ભીની સોડમ ને સૂંધતા જ વળગ્યો
----રેખા શુક્લ

બુધવાર, 22 જૂન, 2016

पार्टी तो अभी शुरू ही हुई








 
"मैं तेरा जबरां फैन हो गया वो बोला"...चलानेवाली स्कूटर पे इत्नी हसीन थी की वो पीछे कसकें पकड के बैठा था और बहोत बहोत खुश था...बिना चप्पल और बिना शर्ट बिच किनारे !! उफ्फ ये चेहरा,सबकी नजर टीकी थी और वो खुशीसे चिल्ला रहा था "मोम. मोम " दरिया में बोट आती और जाती थी मगर सब तो इन दोनों को ही देख रहे थे...जलन हो रही थी या मुग्ध हो रहे थे के कोई इत्ना भी खुश हो सकता हैं क्या ? मोम को टीन-एजर की तरहा बीहेव करते हुवे देख के मैं जुली भी हंस पडी. पेरीस और ग्रीस मैं स्कूटी पे मजे लेना कोई अलग बात नहीं हैं..मगर हाये वो मेरी हंसी पे कुरबान हो गया..उतरा और दोनों हाथ मिलाके चल दिये..नो बीग डील..ना कोई संकोच , ना कोई फोर्मालिटी !! फिर तो रोज रोज मिल्ना,घूमना-फिरना और शोपिंग का नोर्मल रूटीन ही हो गया...होल्ले होल्ले झील सी गेहरी आंखोने मुजे इश्क में डूबा ही डाला...मन ही मन मैं बोल उठ्ठी के लव वील फ्लो नाउ सोफ्ट..क्युं की अब तो मैं भी उस्की फैन जो गई थी !! "चलोना सब मिलके बारिश में भीगे और फिर चलेंगे आइसक्रीम खाने !!" वो बोला और उस्के सब दोस्त आये और फिर क्या...पार्टी तो अभी शुरू ही हुई थी बिच पे...सब झुमते थे म्युझिक की तान पे और मुजे किसने पानी मे दिया धक्का ...सचमुज गिरी मगर इस सपने से बेड के नीचे...हाय रे मेरा जबरां फैन, होय रे मेरा जबरा फैन !!---रेखा शुक्ला ०६/२२/२०१६

રવિવાર, 5 જૂન, 2016

પરોપકારી વ્રુક્ષો નું ગર્ભધારણ....

પગલાં ને મોજ પડે, મંજીલ ને ક્યાં ફર્ક પડે
પગમાં જો મોજ ચડે, દર્દ માં ત્યાં ફર્ક પડે

પામવાને ભલે પડછાયા, પાછળ છોને પડે 
આગળ ડગ સંભાળી ને બસ આગવા પડે

ટપાલ પીરસે શબ્દો, પૂષ્પો છાબ માં પડે
સૂકા પર્ણો ખખડે ગૂંજી, મસ્ત ફૂલે ફર્ક પડે
----રેખા શુક્લ

खामोशी ने दिल दुःखाया फिर खुश्बु ने सेहराया हैं
जन्नते नजारें दिखाया फिर जाके दिल को समजाया है
----रेखा शुक्ला